Friday, September 26, 2008

तुम यदी आज कहो तो |



तेरे लबों की लाली को तुम
आज कहो तो जाम बना दूँ
तेरे फलक की बिंदिया को तुम
आज कहो तो चाँद बना दूँ
तेरे पायल की रुनझुन को तुम
आज कहो तो गीत बना दूँ

तेरे मचलते अरमानो को
आज कहो तो दुल्हन बना दूँ
तेरे नयन की गहराई को
आज कहो तो झील बना दूँ
तेरे उदासी के साए को
आज कहो तो उत्सव कर दूँ

तेरे जीवन के अंधियारे को
आज कहो तो उज्वल कर दूँ
तेरे अधूरे सपने को तुम
आज कहो तो पूरा कर दूँ

तुम यदि आज कहो तो मैं
पतझड़ को सावन कर दूँ
अमावास को पूनम कर दूँ
नदियों को सागर कर दूँ
सोला को सबनम कर दूँ
धरती को जन्नत कर दूँ
तुम यदि आज कहो तो
मैं तुम पर जीवन अर्पण कर दूँ

4 comments:

Preeti said...

Wow!!! So nice, so sweet... full of feelings...fantabulous...and beginning of a new world... keep up the good work.
Thanks!

goorookoolam said...

wah javab nahin bahuth khoob.
woh kaun khush kismat thi jiske liye tum kyakuch karna chahte the
woh kaun badkismat hai jiski duniya
sawarnne se pehle hi ujad gayi.

Vishavjeet Singh said...

Bas bhai bas... kuch unko bhi to karne do??? very sweet!!

Kim Simon said...

This blog is great source of information which is very useful for me. Thank you very much.

BEST LOVE POEMS FOR MOTHER.