Monday, August 18, 2008

मै कैसे भूलूंगा



तू यदि भूल गयी तो भूले
मै कैसे भूलूंगा
तेरी याद का मधुर गीत
अब जीवन भर गाऊंगा .
अब भी याद मुझे है सब कुछ
तेरा वो शरमाना
मुझे बुलाना , मुझे मनाना
मुझको पास बिठाना ।
क्या तू भूल गयी वो सब कुछ
तू कैसे भूलेगी
तू यदि भूल गयी तो भूले
मै कैसे भूलूंगा , मै कैसे भूलूंगा ।
जीवन में यदि दर्द नहीं था
दर्द तुम्ही से पाया
जीवन में यदि नृत्य नहीं था
नृत्य तुम्ही से पाया
जीवन में यदि गीत नहीं था
गीत तुम्ही से पाया
जीवन में यदि ख्वाब नहीं था
ख्वाब तुम्ही से पाया
जीवन में यदि प्यार नहीं था
प्यार तुम्ही से पाया
तू यदि भूल गयी तो भूले
मै कैसे भूलूंगा , मै कैसे भूलूंगा ।
तेरे प्यार की मधुर स्मृतियाँ
मेरा तो यही है
जीवन भर का गीत यही है
जीवन का संगीत यही है
तू यदि भूल गयी तो भूले
मै कैसे भूलूंगा
मै कैसे भूलूंगा ....


1 comment:

ajesh said...

Good job mate, yeh bahut sahi kiya.. apni kavitaon ko logon tak pahunchne ka ek madhyam de diya...
--Ajesh