Monday, September 1, 2008

मै तो दर्द पुजारी हूँ !


तुम खुशियों की बात हो करते
मै तो दर्द पुजारी हूँ
तुम सावन की बात हो करते
मै तो पतझड़ का रही हूँ ।
ढूंढ़ रहे हो तुम खुशियाँ
लेकर के तुम शहनाई
तुम्हे मिलेगा कुछ भी नही
मैंने काँटों से है नीड़ बनाई .
अश्रू जहा की सम्पति है
पीडा ही जहा पर वैभव है
ऐसा देश रहा है मेरा
दर्द जहाँ पर गौरव है ।
मरुथल ही जहाँ पवित्र भूमि है
दर्द के ही मन्दिर है जहाँ
पीडा के ही प्रेम गीत है
ऐसा ही अपना है जहाँ ।





2 comments:

Shitesh said...

Kyaa baat hai bhai jaan .... ye wali sabase mat lag rahi hai

seema gupta said...

दर्द के ही मन्दिर है जहाँ
पीडा के ही प्रेम गीत है
ऐसा ही अपना है जहाँ ।
"mind blowing creation"

Regards