Wednesday, September 17, 2008

माँ , मै तुमसे बहुत प्यार करता हूँ !



कई बार मै सोचता हूँ
की मै तुमसे कहूं -
की माँ मै तुमसे बहुत प्यार करता हूँ
पर मै तुमसे कभी तो नही
कह पाता हूँ ।
और शब्दों से शायद
मै कह भी नही पाऊंगा ,
शब्दों में सामर्थ्य ही नही है
भावों को व्यक्त कर पाने की ।
पर मै जब भी अकेला
भावों में डूबा
तेरे आशीष , ममता
और स्नेह की गर्माहट
को महसूस करता हूँ ,
तब न जाने कब
दो बूँद मोटी
पलकों से टपक जाते है
और वो ही कर पाते है
मेरे भावों को व्यक्त ,
और वो कहते है -
की "माँ " , मै तुमसे बहुत प्यार करता हूँ ।





5 comments:

arik said...

a great feeling !
what a initiate u made.....
for this creation I want to say congrats to Devesh,

Actually every one love his mother , but some times we also don't know that,
But when we are away from our mother then we realize the value of her in our life.

and some times we can't make her realize that how important she is for us ! due to very busy schedule
or other tensions

really a great creation it is

RC said...

You asked for my suggestions, right?
I read this Poem. Al I'll say is ... go, right now (call/meet/whatever), and tell your mother that you love her. I am a mother of two children and I know that is all a mother wants to hear. It will be the happiest moment for her.

For once, think about her and not you. You will be able to say it.

rc

RC said...

Oh yea ...forgot to mention ... very beautiful feelings. Good Poem.

डा.मीना अग्रवाल said...

देवेश तुम्हारी ये कविता 'माँ मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ ' मेरे मन को छू गई . माँ तो बस माँ ही होती है उसकी तुलना संसार की किसी भी वस्तु से नहीं की जा सकती है. माँ तो एक विश्वास है और विश्वास नहीं होता तो आज हम जो हैं वह शायद नहीं होते और न हम अपने पैरों पर खड़े होकर चलना ही सीख सकते थे .माँ तो ईश्वर का ही प्रतिरूप है. लिखते रहिए,आगे बढ़ते रहिए.

मीना अग्रवाल

शारदा अरोरा said...

जैसे आंसुओं की जुबान होती है वैसे ही आपकी लेखनी की जुबान है , इसने शब्दों में सब अनकहा उँडेल दिया है |