Wednesday, September 17, 2008

खाली है दामन , कुछ ना पाया हूँ !


परछाई बनकर लुभाती रही है
खुशियाँ मुझको दौडाती रही है
कितना दौडा हूँ , कितना भागा हूँ
खाली है दामन , कुछ ना पाया हूँ ।

2 comments:

arik said...

wonderful writing,

But it could make more impact if you don't use हूँ
in following lines
कितना दौडा हूँ , कितना भागा हूँ
खाली है दामन , कुछ ना पाया हूँ ।

I personally feel that.....

goorookoolam said...

pyar se bhi jaroori kahin kaam hai
pyar sabkuch nahin aadmi ke liye.
cheer up man
goorookoolam
urf
prita