Wednesday, September 17, 2008

मेरी चाँद कैसी होगी !

कभी कभी मै सोचता हूँ

जब तुम घूंघट में होगी ,

तो कैसी होगी

मेरी चाँद , बिल्कुल मेरी कविता जैसी होगी ।

1 comment:

Ashok@Internet said...

Wonderful, being a young person you have great depth in your Kavita The Poetry