Friday, October 3, 2008

तुम मेरी क्या हो !


तुम्हे क्या बताऊँ
की तुम मेरी क्या हो
मेरी हमसफ़र
तुम मेरी जीन्दगी हो ।
दुनिया की चाहत
की तुम वो परी हो
जिसे मैंने पूजा
तुम वो हँसी हो ।
तारों पे चलती तुम
हुस्ने कमल हो
जिसे मैंने गाया
तुम वो गजल हो ।
जिसे मैंने जन्मों से
माँगा था रब से
मेरी जा वो तुम हो
हां , तुम्ही हो ।


2 comments:

Imran Jalandhari said...

Very nice...........

Vishavjeet Singh said...

वाह लाजवाब! लगता है रूह की गहराई में उतरकर लिखा है॥