
कौन समझेगा मुझे
कौन मुझे प्यार देगा
जिस प्यार की तलाश
में हूँ बरसो से
क्या मुझे वो प्यार
कभी मिलेगा ।
इक धुंधली सी तस्वीर
है उसकी मेरे जेहन में
कब तक मै उसका
इन्तजार करूँ ।
कही वो मेरा
भरम तो नही
या है वो इक सच ।
ये खुदा अब तू
ही बता क्या
वो मेरे सामने आएगी ।
और अगर वो नही
आएगी तो उसकी
तस्वीर मेरे जेहन में
क्यो है और मै क्यों
उसके बारे में सोचता हूँ
अब तू ही बता -
कौन समझेगा मुझे
और कौन मुझे प्यार देगा ।
(यह कविता मेरे प्रिय मित्र चंद्र शेखर द्वारा लिखी गई है और मुझे
बहुत पसंद है , मुझे आशा है आप लोगो को भी पसंद आएगी )
4 comments:
आपको भी धन्य बाद और चन्द्र शेखर जी जिन्होंने रचना लिखी रचना अच्छी है भावः अच्छे हैं / कभी वो मेरा भरम की जगह कहीं वोमेरा भरम तथा ई खुदा की जगह अय खुदा या ऐ खुदा //मेरी एक बात समझ में नहीं आती की तुम लड़के लड़कियां अपने आपसी चक्कर में भगवान् को क्यों बीच में घसीट ते हो =भ्रम है या नहीं ये तुम जानो ,भगवान् इसमे क्या करेगा / और मानलो भगवान् ने आकर कह किया की हाँ बेटा ये तुम्हारा भ्रम था तो क्या तुम मान जाओगे =क्योंकि ये तुम भी जानते हो की ये भ्रम नहीं है /अरे जिसकी तस्बीर तुमने दिल में बसा रखी है किसी भ्रम की तस्बीर थोड़े ही है और किसी से कह मत देना की मैंने भ्रम की तस्बीर दिल में बसा रखी है तो वह कहेगा दिमागी लोचा हो गया है
कौन समझेगा मुझे
कौन मुझे प्यार देगा
जिस प्यार की तलाश
में हूँ बरसो से
क्या मुझे वो प्यार
कभी मिलेगा ।
"very good expression, and the words and style of presenting your thoughts are really wonderful"
Regards
रचना अच्छी है, पर आपके आसार कुछ ऐसे हैं:
ये भ्रम नही है प्यारे, ये भंवर है जवां-ऐ-दिल बहार का।
या तो हुआ है इश्क तुझको, या असर है सिर्फ़ एक बहाव का॥
kya shekar bhai kya likha hai."kaun samaje ga mujhe kaun mujhe pyaar dega" jaise app ki kavita app ki bhavnao ko bayan kar rahi hai jasie koi sach mai aap ka kahi intezar kar rahi ho.eesa lag ta hai aap ki kavita pad kar jaise koi mere bhi intezar kar rahi hai. aap essa hi likte raheye aap ko padkar aachha lagta hai
Komal chawla
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