
तुम जो भी हो मै नही जानता
मै तो केवल इतना जनता हूँ
की तुम मेरी सांसें हो , धड़कन हो ।
माना की तुम मुझसे बहुत दूर हो
किंतु तुम मेरे बहुत पास हो
जितना की मै ख़ुद नही ।
तुम बन चुकी हो यादें मेरी
बस गई हो दिल की बस्ती में ऐसे
की ढूढना चाहा तो ख़ुद खो गया उसी में ।
बस चाहत है तुमसे
की मिल जाओ मुझसे ऐसे
जैसे दो चाहत आत्माए हो ।
मैंने चाहा तुम्हे यह खुस्किस्मती है मेरी
मैंने चाहा क्या ?
ये नज़ारे तो खुदा ने बनाई ही है
की बस तुम्हे dekhata rhoo ।
तुम्हारे नजदीक रह के
कह न सका मै तुमसे
की किसी को चाहना
और चाहत का इजहार
न कर पाना ही शायद प्यार है
तो हां मैंने प्यार किया तुमसे , सिर्फ़ तुमसे ।
2 comments:
बहुत ही सुंदर भाव, सुंदर कविता.
धन्यवाद
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BEST LOVE POEMS FOR MOTHER.
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