
सदा रब से मांगी है खुशियाँ तुम्हारी
सदा खुश रहो ये दुआ है हमारी
अगर तेरे जीवन में गम कोई आये
तो गम सारे मेरे हो
मेरी सारी खुशियाँ तुम्हारी !
कभी तेरे पावों में जो कांटे चुभें तो
काटें तेरे हो तो पीडा हमारी
सदा रब से मांगी है खुशियाँ तुम्हारी
सदा खुश रहो ये दुआ है हमारी !
कभी तेरे पलकों में आंशु जो आयें
अगर आंशु तेरे हो तो आँखें हमारी
सदा रब से मांगी है खुशियाँ तुम्हारी
सदा खुश रहो ये दुआ है हमारी !
18 comments:
वाह बहुत सुंदर कविता, लेकिन ऎसी बाते कविता मै ही अच्छी लगती है, जीवन मै यही बाते जीना दुभर कर देती है जनाब.
धन्यवाद
deepawali ki
dheron
shuhkaamnaaein
बहुत सुंदर कविता...
दीवाली ke शुभ अवसर पर आप को दीवाली की ढेर सारी शुभकामनायें.
ईश्वर करे हर ओर रोशनी केवल इस एक दिन नहीं ,हर दिन रोशनी हर घर आँगन में ऐसे ही जगमगाती रहे.
Diwali ki dheron shubkamnayen.
bahut achchhi rachana .dhero duao ke saath happy diwali .
कभी तेरे पावों में जो कांटे चुभें तो
काटें तेरे हो तो पीडा हमारी
Dipawaali par isse jyada khoobsurat tohfa aur kya ho sakta hai bhla .....!!
कभी तेरे पलकों में आंसू जो आयें
अगर आंसू तेरे हो तो आँखें हमारी ।
बहुत सुंदर ।
bahut hee sunder chahat aur bhav walee kavita !
Badhai
very nice dear!
मनभावन पंक्तियाँ और चित्र ने भी मन मोह लिया...
regards
rab se maangi hai khushiya tumhaari
sada khush raho ye dua hai hamaari
bahut badiya likha hai
gr8 poem...i love the Symmetry
bahut khubsurat kavita.......:)
bahut hi achhi rachna
sundar kavita
देव जी,
यह विज्ञप्ति मित्रों/ब्लॉग-आगन्तुकों के लिए सूचनार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ:
‘मुक्तक विशेषांक’ हेतु रचनाएँ आमंत्रित-
देश की चर्चित साहित्यिक एवं सांस्कृतिक त्रैमासिक पत्रिका ‘सरस्वती सुमन’ का आगामी एक अंक ‘मुक्तक विशेषांक’ होगा जिसके अतिथि संपादक होंगे सुपरिचित कवि जितेन्द्र ‘जौहर’।
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इस संग्रह का हिस्सा बनने के लिए न्यूनतम 10-12 और अधिकतम 20-22 मुक्तक भेजे जा सकते हैं।
लेखकों-कवियों के साथ ही, सुधी-शोधी पाठकगण भी ज्ञात / अज्ञात / सुज्ञात लेखकों के चर्चित अथवा भूले-बिसरे मुक्तक/रुबाइयात/कत्आत भेजकर ‘सरस्वती सुमन’ के इस दस्तावेजी ‘विशेषांक’ में सहभागी बन सकते हैं। प्रेषक का नाम ‘प्रस्तुतकर्ता’ के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। प्रेषक अपना पूरा नाम व पता (फोन नं. सहित) अवश्य लिखें।
इस विशेषांक में एक विशेष स्तम्भ ‘अनिवासी भारतीयों के मुक्तक’ (यदि उसके लिए स्तरीय सामग्री यथासमय मिल सकी) भी प्रकाशित करने की योजना है।
मुक्तक-साहित्य उपेक्षित-प्राय-सा रहा है; इस पर अभी तक कोई ठोस शोध-कार्य नहीं हुआ है। इस दिशा में एक विनम्र पहल करते हुए भावी शोधार्थियों की सुविधा के लिए मुक्तक-संग्रहों की संक्षिप्त समीक्षा सहित संदर्भ-सूची तैयार करने का कार्य भी प्रगति पर है।इसमें शामिल होने के लिए कविगण अपने प्रकाशित मुक्तक/रुबाई/कत्आत के संग्रह की प्रति प्रेषित करें! प्रति के साथ समीक्षा भी भेजी जा सकती है।
प्रेषित सामग्री के साथ फोटो एवं परिचय भी संलग्न करें। समस्त सामग्री केवल डाक या कुरियर द्वारा (ई-मेल से नहीं) निम्न पते पर अति शीघ्र भेजें-
जितेन्द्र ‘जौहर’
(अतिथि संपादक ‘सरस्वती सुमन’)
IR-13/6, रेणुसागर,
सोनभद्र (उ.प्र.) 231218.
मोबा. # : +91 9450320472
ईमेल का पता : jjauharpoet@gmail.com
यहाँ भी मौजूद : jitendrajauhar.blogspot.com
बहुत प्यारी अभिव्यक्ति है इस रचना में ! शुभकामनायें देव!!
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BEST LOVE POEMS FOR MOTHER.
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