Tuesday, March 31, 2009

क्या मै आगे नहीं जा सकता !!


क्या मै जिंदगी के
ऐसे मोड़ से
आगे नहीं जा सकता
जँहा मै बिलकुल अकेला हूँ .
जँहा न मुझे
कोई जानने वाला हो
और न ही पहचानने वाला .
और जो जानने वाले हो
वो मेरी अवहेलना कर दे
जंहा मेरे अस्तित्व की
रच्छा करना मुस्किल पड़ रहा हो
क्या मै जिंदगी के
ऐसे मोड़ से आगे नहीं जा सकता ?

15 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत से सवाल लिये है आप की यह सुंदर कविता, हिम्मत कर तो जहां तक चाहो जा सकते हो.मंजिल आप के कदमो को चुमएगी.
धन्यवाद

hempandey said...

अरे
यह किस दुविधा में हो तुम ?
क्यों खड़े हो इस मोड़ पर ?
दो कदम आगे बढ़ो
देखो उस उगते सूरज को
वह कुछ कह रहा है तुमसे

seema gupta said...

जँहा मै बिलकुल अकेला हूँ .
जँहा न मुझे
कोई जानने वाला हो
और न ही पहचानने वाला
" मन की व्यथा को मुखर करते आपके ये शब्द उस प्रश्न को अपने आप से पुछ रहे हैं.....जिसका उत्तर किसी के पास नहीं.....इंसान चाहे लाख कोशिश करे मगर एक भी ऐसे पल को तलाश नहीं कर पता....क्यूंकि खुद अपना ही साया भी तो कभी अकेला नहीं छोड़ता.....सुंदर अभिव्यक्ति..

Regards

Navnit Nirav said...

pata nahi aapne ye kavita kyon likhi hai.
yadi ichchha ho to hum kahin bhi jaa sakte hain.
Navnit Nirav

Vidhu said...

aapkaa blog dekhaa ...achchaa lagaa...ye jo kitaaben aapki pasand ki hain ...tumhaare liye ,kiski hai aur lekhak koun hain ..bataayenge,

ARVI'nd said...

bahut sundar kavita...baar-baar padhna chahta hu.

Harkirat Haqeer said...

क्या मै जिंदगी के
ऐसे मोड़ से
आगे नहीं जा सकता
जँहा मै बिलकुल अकेला हूँ .

kyon nahi ja sakte....??

हर मंजिल का रास्ता है
तू कदम बढा के तो देख.....!!

Suman said...

shukriya aapko
loksangharsha.blogspot.com

sandhyagupta said...

Sundar bhivyakti.Badhai.

Nirmla Kapila said...

अरे बेटा कयों नही जा सकते तुम तो बहुत आगे तक जाओगे मगर वहन नही जहान तुम्हें कोई जानता ना हो बल्कि वहा तक जहां तुम्हारी अहट से ही तुम्हारे होने का एह्सास लोगों को हो गा एक दिन दुनिया तुम्हारे आगे पीछे होगी अब तुम वहँ नही जा सकते जहाँ तुम्हें कोई ना जानता हो रचना अच्छी है शुभ्कामनायें

*KHUSHI* said...

shaayd ye sawal har ek insaan ke dimaag mai ek baar to aaya hoga.. aur shaayd sabhi ne apni manzil ki khoj ki hai yaa khoj jaari hai....sabke dimaag mai aate hue vicharo ko apane kavita se sundar abhivyakti pesh ki

अनुपम अग्रवाल said...

सुन्दर प्रस्तुतिकरण .

कुछ सोचने को विवश करती रचना

Restless soul said...

agar sawaal utha hai to jawaab bhi mil hi jaayega.........

Pyaas itni gehri hoti jaaye ki pyaass bhi khud se sawaal karna chod de.....jis din yahi awaaj rom rom se aayegi....to jawaab mil jayega......

kehtain hai.....

ishratain katra hai dariya main fana ho jana....
Dard ka had se gujarna hai, dawa ho jaana......

निर्झर'नीर said...

aapki kahani padhi ..bahot sundar bhaav...
ek naya or unchuua khayal aapne kahani mai piroya hai


aapki ye kavita bhi saargarbhit hai ..bhavo ko jhakjhor rahi hai..

yakinan kabil-e-daad
kubool karen

Kim Simon said...

This blog is great source of information which is very useful for me. Thank you very much.

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