Tuesday, January 6, 2009

मेरा मै और मै !


मेरा वर्तमान, भूत की तरह
पल पल गुजर रहा है
प्रतिपल , मै मर रहा हूँ
क्या कभी जीवित भी रहूँगा ?
सोच के डर जाता हूँ
की मेरा मै भी मर जाएगा ।
चिंतन करता हूँ तो पाता हूँ
की मेरा मै ही नही जीने देता मुझे ।
भूत को देखता हूँ तो पाता हूँ
की मेरा मै, मुझे मै , मै कर मारता रहा
और मै विवश मै मरता रहा
क्या कभी मै को मारा मैंने ?
आज भी असंतुस्ट हूँ , अस्थिर हूँ , बेचैन हूँ ।
सोचता हूँ भविष्य के बारे में
तो डर जाता हूँ
की मै ना मरा तो मै मर जाऊंगा
शायद कभी नही जी सकूंगा
कभी नही .........

28 comments:

राज भाटिय़ा said...

बहुत ही सच लिखा आप ने, यह मै* ही सब को मार रहा है.
धन्यवाद

अविनाश said...

चिंतन करता हूँ तो पता हूँ
की मेरा मै ही नही जीने देता मुझे ।
भूत को देखता हूँ तो पता हूँ
की मेरा मै, मुझे मै , मै कर मारता रहा
और मै विवश मै मरता रहा
क्या कभी मै को मारा मैंने ?
बहुत ही सच लिखा आप ने
Sundar rachna

Nirmla Kapila said...

देव जी केसे है आप आप इतना बडिया केसे लिख्ते हैं ऐसे ही लगे रहिये आशीर्वाद्

Nirmla Kapila said...

ाज आपकी पहली कविता माँ पडी बहुत ही अच्छी लगी बधाई और मां की तरफ से ढेर सारा प्यार्

seema gupta said...

क्या कभी मै को मारा मैंने ?
आज भी असंतुस्त हूँ , अस्थिर हूँ , बेचैन हूँ ।
" मै की ये व्यथा बहुत गहरी होती है , ये मै किसी को चैन से जीने भी नही देता....और ये मै हमारा माजी होता है जो हर पल हमारे ही साथ चलता है..... भावनाओ की शानदार अभिव्यक्ति.."
regards

RC said...

Its beautiful !!! Bahut achche!
such deep thoughts at this age !!

God bless you
RC

MUFLIS said...

"kya kabhi main ko mara maine?"
waah ! zindgi ke phalsaphe ko bahot hi umda treeqe se byaan kiya hai aapne.... badhaaee !!
---MUFLIS---

आशुतोष दुबे "सादिक" said...

aapne bahut hi sundar likha hai,isi tarah aap likhte rahe,aap kabhi hamare blog par aaiye,aap ka swagat hai,
http://meridrishtise.blogspot.com

"अर्श" said...

bahot khub likha hai aapne ...dhero badhai aapko bhi sahab........

Smart Indian - स्मार्ट इंडियन said...

सच, बहुत सुंदर!
माली आवत देखिकै, कलियाँ करीं पुकार।
फूली-फूली चुनि लईं, कालि हमारी बार॥ (कबीरदास)

आशुतोष दुबे "सादिक" said...

“aap ne mujhe jo pyar diya hai,iske liye aapko dhanyawaad,aap ka sneh isi tarah milta rahe,isi asha…

Amit said...

bahut hi sahi likha hai aapne...

COMMON MAN said...

मुझे तो आपकी रचनाओं के साथ फोटो भी बहुत सुन्दर लगे.

विनय said...

बहुत गहरी मनोभावना का उद्भव है!

---मेरा पृष्ठ
चाँद, बादल और शाम

Harsh pandey said...

dev sahab blog me aapki kavita padkar achcha laga

विनय said...

आपका सहयोग चाहूँगा कि मेरे नये ब्लाग के बारे में आपके मित्र भी जाने,

ब्लागिंग या अंतरजाल तकनीक से सम्बंधित कोई प्रश्न है अवश्य अवगत करायें
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

hem pandey said...

जरूरत है 'मैं' को सब बनाने की. सुंदर भाव भरी कविता के लिए साधुवाद.

विनय said...

मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ
मेरे तकनीकि ब्लॉग पर आप सादर आमंत्रित हैं

-----नयी प्रविष्टि
आपके ब्लॉग का अपना SMS चैनल बनायें
तकनीक दृष्टा/Tech Prevue

Mahesh Prakash Purohit said...

great !! great !! great !!
ek lambe samay se main jo kuch anubhav kar rahaa tha...use isse behter shabdo me kaise vyakt kiya ja sakta hai...yah soch pana bhi mushkil hai !! itni achchhi rachna ke liye badhai !!

Nirmla Kapila said...

devji kese hain aap vese to aapki rachna apki raji khushi bata deti hai par ek maa ko fir bhi beton ki chintaa rehti hai
chahe shabd mook hain, abhivykti adrishy hai magar man me ek bhavna prabal hai ke tumhara k tumhaara ek din nahi jeevan ka har pal ujval ho

Poonam Agrawal said...

Aapki lekhni bahut hi sashakt hai ......badhai

Dr.Bhawna said...
This comment has been removed by the author.
शोभा said...

मेरा वर्तमान, भूत की तरह
पल पल गुजर रहा है
प्रतिपल , मै मर रहा हूँ
क्या कभी जीवित भी रहूँगा ?
सोच के डर जाता हूँ
की मेरा मै भी मर जाएगा ।
चिंतन करता हूँ तो पाता हूँ
की मेरा मै ही नही जीने देता मुझे ।
भूत को देखता हूँ तो पाता हूँ
की मेरा मै, मुझे मै , मै कर मारता रहा
और मै विवश मै मरता रहा
क्या कभी मै को मारा मैंने ?
वाह बहुत अच्छा लिखा है.

Dr.Bhawna said...

Bahut achi racna ha bahut2 badhai..

आशुतोष दुबे "सादिक" said...

मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ

Sanjiv Tiwari said...

"............
और मै विवश मै मरता रहा
क्या कभी मै को मारा मैंने ?
..............."
शानदार अभिव्यक्ति !

Dev said...

"मेरा मै और मै " कविता पर आप - माँ निर्मला कपिला, राज सर, अविनाश भाई, सीमा मैम, रूपम जी, मुफ्लिश भाई, आशुतोष दुबे, अर्श भाई, स्मार्ट इंडियन सर, अमित भाई, कॉमन मैन जी, विनय भाई, हर्ष पाण्डेय जी, हेम पाण्डेय जी, महेश जी, पूनम जी, शोभा जी, डॉ. भावना जी और संजीव जी का स्नेह और प्यार मिला . मुझे आप लोगों के स्नेह आशिष और उत्साह वर्धन की हमेशा आवश्यकता रहेगी . देव

Kim Simon said...

This blog is great source of information which is very useful for me. Thank you very much.

BEST LOVE POEMS FOR MOTHER.