
मेरा वर्तमान, भूत की तरह
पल पल गुजर रहा है
प्रतिपल , मै मर रहा हूँ
क्या कभी जीवित भी रहूँगा ?
सोच के डर जाता हूँ
की मेरा मै भी मर जाएगा ।
चिंतन करता हूँ तो पाता हूँ
की मेरा मै ही नही जीने देता मुझे ।
भूत को देखता हूँ तो पाता हूँ
की मेरा मै, मुझे मै , मै कर मारता रहा
और मै विवश मै मरता रहा
क्या कभी मै को मारा मैंने ?
आज भी असंतुस्ट हूँ , अस्थिर हूँ , बेचैन हूँ ।
सोचता हूँ भविष्य के बारे में
तो डर जाता हूँ
की मै ना मरा तो मै मर जाऊंगा
शायद कभी नही जी सकूंगा
कभी नही .........
27 comments:
बहुत ही सच लिखा आप ने, यह मै* ही सब को मार रहा है.
धन्यवाद
चिंतन करता हूँ तो पता हूँ
की मेरा मै ही नही जीने देता मुझे ।
भूत को देखता हूँ तो पता हूँ
की मेरा मै, मुझे मै , मै कर मारता रहा
और मै विवश मै मरता रहा
क्या कभी मै को मारा मैंने ?
बहुत ही सच लिखा आप ने
Sundar rachna
देव जी केसे है आप आप इतना बडिया केसे लिख्ते हैं ऐसे ही लगे रहिये आशीर्वाद्
ाज आपकी पहली कविता माँ पडी बहुत ही अच्छी लगी बधाई और मां की तरफ से ढेर सारा प्यार्
क्या कभी मै को मारा मैंने ?
आज भी असंतुस्त हूँ , अस्थिर हूँ , बेचैन हूँ ।
" मै की ये व्यथा बहुत गहरी होती है , ये मै किसी को चैन से जीने भी नही देता....और ये मै हमारा माजी होता है जो हर पल हमारे ही साथ चलता है..... भावनाओ की शानदार अभिव्यक्ति.."
regards
Its beautiful !!! Bahut achche!
such deep thoughts at this age !!
God bless you
RC
"kya kabhi main ko mara maine?"
waah ! zindgi ke phalsaphe ko bahot hi umda treeqe se byaan kiya hai aapne.... badhaaee !!
---MUFLIS---
aapne bahut hi sundar likha hai,isi tarah aap likhte rahe,aap kabhi hamare blog par aaiye,aap ka swagat hai,
http://meridrishtise.blogspot.com
bahot khub likha hai aapne ...dhero badhai aapko bhi sahab........
सच, बहुत सुंदर!
माली आवत देखिकै, कलियाँ करीं पुकार।
फूली-फूली चुनि लईं, कालि हमारी बार॥ (कबीरदास)
“aap ne mujhe jo pyar diya hai,iske liye aapko dhanyawaad,aap ka sneh isi tarah milta rahe,isi asha…
bahut hi sahi likha hai aapne...
मुझे तो आपकी रचनाओं के साथ फोटो भी बहुत सुन्दर लगे.
बहुत गहरी मनोभावना का उद्भव है!
---मेरा पृष्ठ
चाँद, बादल और शाम
dev sahab blog me aapki kavita padkar achcha laga
आपका सहयोग चाहूँगा कि मेरे नये ब्लाग के बारे में आपके मित्र भी जाने,
ब्लागिंग या अंतरजाल तकनीक से सम्बंधित कोई प्रश्न है अवश्य अवगत करायें
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जरूरत है 'मैं' को सब बनाने की. सुंदर भाव भरी कविता के लिए साधुवाद.
great !! great !! great !!
ek lambe samay se main jo kuch anubhav kar rahaa tha...use isse behter shabdo me kaise vyakt kiya ja sakta hai...yah soch pana bhi mushkil hai !! itni achchhi rachna ke liye badhai !!
devji kese hain aap vese to aapki rachna apki raji khushi bata deti hai par ek maa ko fir bhi beton ki chintaa rehti hai
chahe shabd mook hain, abhivykti adrishy hai magar man me ek bhavna prabal hai ke tumhara k tumhaara ek din nahi jeevan ka har pal ujval ho
Aapki lekhni bahut hi sashakt hai ......badhai
मेरा वर्तमान, भूत की तरह
पल पल गुजर रहा है
प्रतिपल , मै मर रहा हूँ
क्या कभी जीवित भी रहूँगा ?
सोच के डर जाता हूँ
की मेरा मै भी मर जाएगा ।
चिंतन करता हूँ तो पाता हूँ
की मेरा मै ही नही जीने देता मुझे ।
भूत को देखता हूँ तो पाता हूँ
की मेरा मै, मुझे मै , मै कर मारता रहा
और मै विवश मै मरता रहा
क्या कभी मै को मारा मैंने ?
वाह बहुत अच्छा लिखा है.
Bahut achi racna ha bahut2 badhai..
मकर संक्रान्ति की शुभकामनाएँ
"............
और मै विवश मै मरता रहा
क्या कभी मै को मारा मैंने ?
..............."
शानदार अभिव्यक्ति !
"मेरा मै और मै " कविता पर आप - माँ निर्मला कपिला, राज सर, अविनाश भाई, सीमा मैम, रूपम जी, मुफ्लिश भाई, आशुतोष दुबे, अर्श भाई, स्मार्ट इंडियन सर, अमित भाई, कॉमन मैन जी, विनय भाई, हर्ष पाण्डेय जी, हेम पाण्डेय जी, महेश जी, पूनम जी, शोभा जी, डॉ. भावना जी और संजीव जी का स्नेह और प्यार मिला . मुझे आप लोगों के स्नेह आशिष और उत्साह वर्धन की हमेशा आवश्यकता रहेगी . देव
This blog is great source of information which is very useful for me. Thank you very much.
BEST LOVE POEMS FOR MOTHER.
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